पटना व रांची पहुंचने लगी औरंगाबाद से रक्त
Dec 01, 11:18 pm
औरंगाबाद डीएम कुन्दन कुमार के प्रयास से सदर अस्पताल में रेडक्रास सोसाइटी द्वारा खोला गया ब्लड बैंक कारगर साबित हुआ है। यहां से गया के अलावा पटना व रांची जैसे शहर में ब्लड भेजी जा रही है। सोसाइटी के सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि पटना के बाद सुचारू रूप से कार्य करने वाला यह दूसरा ब्लड बैंक है। 4 सितम्बर को ब्लड बैंक खुला था जिसमें अब तक 78 मरीजों को रक्त दिया गया है। 131 लोगों से रक्त लिया गया है। 4 गरीबों को नि:शुल्क रक्त देकर जान बचाई गई है। सचिव ने बताया कि स्थानीय अस्पताल के मरीजों को नि:शुल्क रक्त दिया जाता है। दूसरे जगह भेजने पर ब्लड की कीमत 350 रुपए ली जाती है। बताया कि तत्काल में ब्लड बैंक में ए व बी पाजिटिव के 14, एबी निगेटिव के 2, ओ पोजिटिव के 12, बी व ओ निगेटिव के 2 बैग ब्लड उपलब्ध है। ओ निगेटिव ब्लड रखने मामले में यह ब्लड बैंक पहला है।
इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
Tuesday, 1 December 2009
तीन चिकित्सकों पर प्रपत्र क गठन की तैयारी
Nov 30, 08:14 pm
औरंगाबाद सदर अस्पताल में पदस्थापित तीन चिकित्सकों के खिलाफ प्रपत्र 'क' गठित की जाएगी। चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है। सिविल सर्जन डा. एसके अमन ने सोमवार को बताया कि डा. निर्मला, डा. सचिन कुमार, डा. मीत कुमार सदर अस्पताल में पदस्थापन के बावजूद गायब है। उन्होंने बताया कि तीनों को अस्पताल में योगदान देने के आदेश दिए गए इसके बावजूद योगदान नहीं किया। सीएस के अनुसार डा. सचिन कुमार सासाराम, डा. निर्मला औरंगाबाद एवं डा. मीत कुमार अरवल में निजी क्लिनिक चलाते है। सीएस ने सोमवार को नवीनगर अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा पदाधिकारी डा. ईश्वरी प्रसाद साह गायब मिले। यहां चार कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए। सीएस ने बताया कि चिकित्सा पदाधिकारी एवं कर्मियों के वेतन निकासी पर रोक लगा दी गई है। सीएस ने सोमवार को ही कुटुम्बा प्रखंड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र महाराजगंज का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सक एवं कर्मचारी गायब मिले। अस्पताल में ताला बंद था। सीएस ने बताया कि अस्पताल से गायब मिले चिकित्सकों एवं कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल से चिकित्सकों के गायब होने की सूचना लगातार मिल रही है जिस पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सक को ले प्रदर्शन कर रही महिलाओं द्वारा चिकित्सकों से जो पैसा वसूलने का आरोप लगाया गया है वह गलत है। उन्होंने बताया कि रिसियप अस्पताल में पदस्थापित डा. निर्मला का पदस्थापन सदर अस्पताल में किया गया परंतु उन्होंने योगदान नहीं दिया। अरवल में पदस्थापित डा. रंजू की प्रतिनियुक्ति सदर अस्पताल में की गई परंतु उन्होंने भी योगदान नहीं किया। सिविल सर्जन ने कहा कि जो भी चिकित्सक अस्पताल से गायब रहेगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि सदर अस्पताल में महिला चिकित्सक न होने एवं अस्पताल से चिकित्सकों एवं कर्मियों के गायब होने की खबर दैनिक जागरण में लगातार छप रही है।
औरंगाबाद सदर अस्पताल में पदस्थापित तीन चिकित्सकों के खिलाफ प्रपत्र 'क' गठित की जाएगी। चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है। सिविल सर्जन डा. एसके अमन ने सोमवार को बताया कि डा. निर्मला, डा. सचिन कुमार, डा. मीत कुमार सदर अस्पताल में पदस्थापन के बावजूद गायब है। उन्होंने बताया कि तीनों को अस्पताल में योगदान देने के आदेश दिए गए इसके बावजूद योगदान नहीं किया। सीएस के अनुसार डा. सचिन कुमार सासाराम, डा. निर्मला औरंगाबाद एवं डा. मीत कुमार अरवल में निजी क्लिनिक चलाते है। सीएस ने सोमवार को नवीनगर अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा पदाधिकारी डा. ईश्वरी प्रसाद साह गायब मिले। यहां चार कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए। सीएस ने बताया कि चिकित्सा पदाधिकारी एवं कर्मियों के वेतन निकासी पर रोक लगा दी गई है। सीएस ने सोमवार को ही कुटुम्बा प्रखंड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र महाराजगंज का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सक एवं कर्मचारी गायब मिले। अस्पताल में ताला बंद था। सीएस ने बताया कि अस्पताल से गायब मिले चिकित्सकों एवं कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल से चिकित्सकों के गायब होने की सूचना लगातार मिल रही है जिस पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सक को ले प्रदर्शन कर रही महिलाओं द्वारा चिकित्सकों से जो पैसा वसूलने का आरोप लगाया गया है वह गलत है। उन्होंने बताया कि रिसियप अस्पताल में पदस्थापित डा. निर्मला का पदस्थापन सदर अस्पताल में किया गया परंतु उन्होंने योगदान नहीं दिया। अरवल में पदस्थापित डा. रंजू की प्रतिनियुक्ति सदर अस्पताल में की गई परंतु उन्होंने भी योगदान नहीं किया। सिविल सर्जन ने कहा कि जो भी चिकित्सक अस्पताल से गायब रहेगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि सदर अस्पताल में महिला चिकित्सक न होने एवं अस्पताल से चिकित्सकों एवं कर्मियों के गायब होने की खबर दैनिक जागरण में लगातार छप रही है।
कागज पर पूर्ण हुए हैं विद्युत व पीएचईडी विभाग के कार्य
Nov 30, 08:14 pm
औरंगाबाद
सरकार के चार वर्ष पूरा होने पर जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट कार्ड में कई दावे गलत है। अधिकारियों ने डीएम को गलत रिपोर्ट उपलब्ध कराये हैं। स्थल पर जब इसकी जानकारी ली गई तो दावा कागजों तक सिमटा दिखा। हद यह कि बिना निर्माण के ही दावा कर दिया गया कि मदनपुर एवं दाउदनगर बाजार में विद्युत वितरण उप केन्द्र का निर्माण किया गया है। जलापूर्ति योजना के पूर्ण होने का दावा भी गलत है। रिपोर्ट कार्ड के पृष्ठ दो पर दावा किया गया है कि औरंगाबाद शहर, देव बाजार, मदनपुर बाजार एवं दाउदनगर बाजार में विद्युत वितरण उपकेन्द्र का निर्माण किया गया है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं हुआ है। मदनपुर बाजार में पच्चीस वर्ष पहले विद्युत उपकेन्द्र बना है। केन्द्र में उपस्थित स्विच बोर्ड आपरेटर अभय सिंह ने बताया कि मदनपुर में कोई वितरण उप केन्द्र नहीं बना है। दाउदनगर शहर में भी विद्युत विभाग का कोई निर्माण कार्य पिछले एक दशक में नहीं हुआ है। विभागीय एसडीओ अविनाश कुमार के अनुसार पावर सब स्टेशन तरार में है दाउदनगर में कोई निर्माण नहीं है। यह दावा गलत है। हसपुरा में पावर हाउस बनकर तैयार हैं परंतु किसी काम का नहीं। हसपुरा प्रखंड मुख्यालय आठ वर्षो से अंधेरा में है। इसी तरह जलापूर्ति योजनाओं के संबंध में किया गया दावा आधा सच है। पृष्ठ छह पर दावा किया गया है कि देव, डिहरा, ओबरा एवं हसपुरा में क्रमश: 96.028 लाख, 26.956 लाख, 40.562 लाख तथा 48.843 लाख रुपए से ग्रामीण जलापूर्ति योजना पूर्ण हो चुकी है। जानकारों के अनुसार हसपुरा का जलमीनार निर्माणाधीन है। और इस मामले में लाखों रुपए की निकासी हो चुकी है लेकिन हसपुरावासियों को पानी नसीब नहीं हुआ है। देव में भी पानी की आपूर्ति नहीं होती है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि हसपुरा में टावर के बिना पानी आपूर्ति हो रही है। इसी तरह बिना टावर के ही ओबरा में पानी आपूर्ति हो रही है जबकि डिहरा में बिजली के अभाव में पानी आपूर्ति नहीं हो रही है। सूत्रों के अनुसार ओबरा के किसी घर में पानी आपूर्ति नहीं होती बल्कि प्रखंड कार्यालय परिसर में पीने का पानी एक नल के जरिए बर्बाद हो रहा है। डिहरा निवासी रामप्रवेश यादव, हरिनंदन यादव, रामशरण राम, प्रकाश कुमार ने बताया कि कही भी नल नजर नहीं आता। अगर बिजली आ भी गई तो पानी कैसे आपूर्ति होगी। विधायक सत्यनारायण सिंह ने कहा कि सरकार के प्रशासन ने गलत दावा कर वाहवाही लूटने की कोशिश की है। चार वर्षो में धरातल पर कार्य कम और कागज पर अधिक हुआ है।
औरंगाबाद
सरकार के चार वर्ष पूरा होने पर जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट कार्ड में कई दावे गलत है। अधिकारियों ने डीएम को गलत रिपोर्ट उपलब्ध कराये हैं। स्थल पर जब इसकी जानकारी ली गई तो दावा कागजों तक सिमटा दिखा। हद यह कि बिना निर्माण के ही दावा कर दिया गया कि मदनपुर एवं दाउदनगर बाजार में विद्युत वितरण उप केन्द्र का निर्माण किया गया है। जलापूर्ति योजना के पूर्ण होने का दावा भी गलत है। रिपोर्ट कार्ड के पृष्ठ दो पर दावा किया गया है कि औरंगाबाद शहर, देव बाजार, मदनपुर बाजार एवं दाउदनगर बाजार में विद्युत वितरण उपकेन्द्र का निर्माण किया गया है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं हुआ है। मदनपुर बाजार में पच्चीस वर्ष पहले विद्युत उपकेन्द्र बना है। केन्द्र में उपस्थित स्विच बोर्ड आपरेटर अभय सिंह ने बताया कि मदनपुर में कोई वितरण उप केन्द्र नहीं बना है। दाउदनगर शहर में भी विद्युत विभाग का कोई निर्माण कार्य पिछले एक दशक में नहीं हुआ है। विभागीय एसडीओ अविनाश कुमार के अनुसार पावर सब स्टेशन तरार में है दाउदनगर में कोई निर्माण नहीं है। यह दावा गलत है। हसपुरा में पावर हाउस बनकर तैयार हैं परंतु किसी काम का नहीं। हसपुरा प्रखंड मुख्यालय आठ वर्षो से अंधेरा में है। इसी तरह जलापूर्ति योजनाओं के संबंध में किया गया दावा आधा सच है। पृष्ठ छह पर दावा किया गया है कि देव, डिहरा, ओबरा एवं हसपुरा में क्रमश: 96.028 लाख, 26.956 लाख, 40.562 लाख तथा 48.843 लाख रुपए से ग्रामीण जलापूर्ति योजना पूर्ण हो चुकी है। जानकारों के अनुसार हसपुरा का जलमीनार निर्माणाधीन है। और इस मामले में लाखों रुपए की निकासी हो चुकी है लेकिन हसपुरावासियों को पानी नसीब नहीं हुआ है। देव में भी पानी की आपूर्ति नहीं होती है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि हसपुरा में टावर के बिना पानी आपूर्ति हो रही है। इसी तरह बिना टावर के ही ओबरा में पानी आपूर्ति हो रही है जबकि डिहरा में बिजली के अभाव में पानी आपूर्ति नहीं हो रही है। सूत्रों के अनुसार ओबरा के किसी घर में पानी आपूर्ति नहीं होती बल्कि प्रखंड कार्यालय परिसर में पीने का पानी एक नल के जरिए बर्बाद हो रहा है। डिहरा निवासी रामप्रवेश यादव, हरिनंदन यादव, रामशरण राम, प्रकाश कुमार ने बताया कि कही भी नल नजर नहीं आता। अगर बिजली आ भी गई तो पानी कैसे आपूर्ति होगी। विधायक सत्यनारायण सिंह ने कहा कि सरकार के प्रशासन ने गलत दावा कर वाहवाही लूटने की कोशिश की है। चार वर्षो में धरातल पर कार्य कम और कागज पर अधिक हुआ है।
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