Dec 24, 09:39 pm
बारुण (औरंगाबाद) मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना के तहत प्रखंड के किसानों के बीच धान का बीज बंटना था। किसानों के लिए 417 बैग धान उपलब्ध कराए गए थे परंतु धान गोदाम में पड़ा रहा। किसानों को सिर्फ 65 बैग धान मिला। बचे 352 बैग बीज को पूर्व प्रखंड कृषि पदाधिकारी सह जनसेवक चितरंजन कुमार गुरुवार को बेच रहे थे तभी किसानों ने उन्हे पकड़ गया। इसकी सूचना किसानों ने बीडीओ को दी। किसानों की सूचना पर बीडीओ ने अंचल निरीक्षक बैरिस्टर राम को बारुण ब्लाक मोड़ स्थित राइस मिल भेजा तो वहां बीआर24जी- 0356 नंबर की टाटा पिकअप वैन पर लदा धान का बीज मिला। अंचल निरीक्षक ने बीज को जब्त कर प्रखंड कार्यालय स्थित गोदाम में रखवाया। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि गोदाम की चाभी एवं बीजों का प्रभार पूर्व प्रभारी के पास था। उन्हे बीज का प्रभार नहीं मिला था। बीडीओ ने बताया कि मामले में प्रखंड कृषि पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा जाएगा, इसके बाद कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि किसानों के बीच बीज क्यों नहीं बंटे इसकी भी जांच की जाएगी। बीडीओ ने बताया कि कृषि पदाधिकारी किसके अनुमति से बाहर है इसकी भी जांच होगी।
इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
Thursday, 24 December 2009
पुलिस की सुस्ती देखनी है तो चले आइए ओबरा
Dec 24, 09:39 pm
औरंगाबाद पुलिस की सुस्ती देखनी है तो ओबरा आइए। यहां पदस्थापित पुलिसकर्मी कार्य करना नहीं चाहते है। स्थिति यह है कि अपराधियों के हौसले बुलंद है और आमजन अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित। आंकड़ों पर नजर डालें तो ओबरा पुलिस की हकीकत सामने आती है। यहां पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करती है। न्यायालय से निर्गत वारंट महीनों से लंबित है। विभिन्न कांडों के 42 अभियुक्त छूटा घूम रहे है। और पुलिस वारंट लेकर चुप बैठी है। ये सभी वारंट अजमानतीय हैं। 21 अभियुक्तों के खिलाफ कुर्की वारंट निर्गत है। परंतु पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। स्थिति यह है कि अपराधियों में पुलिस का भय समाप्त हो गया है। न्यायालय से निर्गत वारंटों के निष्पादन के आदेश प्रत्येक माह एसपी व थानाध्यक्ष को देते है। परंतु उस पर शायद ही कार्रवाई होती है। एसपी द्वारा जारी किया गया आंकड़ा बताता है कि ओबरा थाने में न्यायालय से निर्गत 166 अजमानतीय व 200 जमानतीय वारंट लंबित है। पुलिस वारंटों को कहां रख दी है कोई नहीं जानता। यहां 12 स्थायी वारंट भी लंबित है। अपराध पर नजर डाले तो यहां अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे है। तीन दिन पहले एनएच 98 स्थित चिराग सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप से दो लाख की लूट हुई। एक अपराधी को कर्मचारियों ने धर दबोचा जिसने अपराध में शामिल सभी अपराधियों के नाम बताएं परंतु आज तक कोई भी अपराधी गिरफ्तार नहीं हो सका। अपराधियों की गिरफ्तारी करने की दावा पुलिस करती है। परंतु हकीकत कुछ और है। इसी तरह बेल बूथ पर पैक्स चुनाव के दौरान पूर्व मुखिया विजय सिंह के साथ मारपीट हुई। खून से लथपथ विजय सिंह का इलाज सदर अस्पताल में कराया गया। इनके बयान पर प्राथमिकी दर्ज हुई और चार के खिलाफ पुलिस ने न्यायालय से वारंट लिया। चार माह बीत गए आज तक एक भी अभियुक्त गिरफ्तार नहीं हुए।
औरंगाबाद पुलिस की सुस्ती देखनी है तो ओबरा आइए। यहां पदस्थापित पुलिसकर्मी कार्य करना नहीं चाहते है। स्थिति यह है कि अपराधियों के हौसले बुलंद है और आमजन अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित। आंकड़ों पर नजर डालें तो ओबरा पुलिस की हकीकत सामने आती है। यहां पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार नहीं करती है। न्यायालय से निर्गत वारंट महीनों से लंबित है। विभिन्न कांडों के 42 अभियुक्त छूटा घूम रहे है। और पुलिस वारंट लेकर चुप बैठी है। ये सभी वारंट अजमानतीय हैं। 21 अभियुक्तों के खिलाफ कुर्की वारंट निर्गत है। परंतु पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। स्थिति यह है कि अपराधियों में पुलिस का भय समाप्त हो गया है। न्यायालय से निर्गत वारंटों के निष्पादन के आदेश प्रत्येक माह एसपी व थानाध्यक्ष को देते है। परंतु उस पर शायद ही कार्रवाई होती है। एसपी द्वारा जारी किया गया आंकड़ा बताता है कि ओबरा थाने में न्यायालय से निर्गत 166 अजमानतीय व 200 जमानतीय वारंट लंबित है। पुलिस वारंटों को कहां रख दी है कोई नहीं जानता। यहां 12 स्थायी वारंट भी लंबित है। अपराध पर नजर डाले तो यहां अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे है। तीन दिन पहले एनएच 98 स्थित चिराग सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप से दो लाख की लूट हुई। एक अपराधी को कर्मचारियों ने धर दबोचा जिसने अपराध में शामिल सभी अपराधियों के नाम बताएं परंतु आज तक कोई भी अपराधी गिरफ्तार नहीं हो सका। अपराधियों की गिरफ्तारी करने की दावा पुलिस करती है। परंतु हकीकत कुछ और है। इसी तरह बेल बूथ पर पैक्स चुनाव के दौरान पूर्व मुखिया विजय सिंह के साथ मारपीट हुई। खून से लथपथ विजय सिंह का इलाज सदर अस्पताल में कराया गया। इनके बयान पर प्राथमिकी दर्ज हुई और चार के खिलाफ पुलिस ने न्यायालय से वारंट लिया। चार माह बीत गए आज तक एक भी अभियुक्त गिरफ्तार नहीं हुए।
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