इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
Thursday, 15 December 2011
दलालों ने निकाले इंदिरा आवास के 35 हजार
रफीगंज (औरंगाबाद), निज प्रतिनिधि : लट्टा पंचायत के अचुकी गांव निवासी गोवर्धन पासवान की पत्नी रजमनिया देवी के नाम आवंटित इंदिरा आवास का पैसा दलाल निकालकर कोआपरेटिव बैंक से खा गए। पैसा नहीं मिलने के कारण रजमनिया का घर नहीं बन सका। मामले में न्याय को लेकर रजमनिया प्रखंड एवं अन्य कार्यालयों का दौड़ लगाते थक चुकी है। बताया कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में मेरे नाम इंदिरा आवास आवंटित किया गया। आवास बनाने के लिए 35 हजार रुपया खाता में दिया गया। तत्कालीन पंचायत सचिव राजाराम यादव ने कोआपरेटिव बैंक में खाता संख्या 10181 खुलवाया। खाते से रुपए की निकासी हो चुकी है। रजमनिया ने बताया कि हमें पैसा नहीं मिली। लगता है दलाल एवं पंचायत सचिव निकालकर पैसा खा गए। पूछे जाने पर परिक्ष्यमान उपसमाहर्ता विजयंत ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जिन लोगों ने गलत तरीके से पैसे की निकासी की होगी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। बता दें कि इंदिरा के पैसे के निकासी की सूचना अधिकारियों को लगातार मिल रही है। अब तक इस मामले में छह केश दर्ज हो चुकी है। हसपुरा कोआपरेटिव बैंक प्रबंधक गणेश शर्मा इसी तरह के मामले में जेल में बंद हैं।
दवा खरीद घोटाले में सच बोलने की सजा भंडारपाल गंगा प्रसाद को मिली है।
दवा खरीद घोटाले में सच बोलने की सजा भंडारपाल गंगा प्रसाद को मिली है। सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह के समक्ष सीएस व डीपीएम के खिलाफ मुंह खोलना गंगा को महंगा पड़ा। मंत्री ने 30 नवंबर को सदर अस्पताल में दवा खरीद घोटाला की जांच की थी। भंडारपाल ने खरीद में हुए घोटाला की पूरी जानकारी मंत्री को दी थी। बताया जाता है कि नियम को ताक पर रखकर सीएस व डीपीएम ने दवा खरीदी है। राज्य स्वास्थ समिति द्वारा घोषित कंपनी से दवा न खरीद बाहर से दवा खरीदी गई है। वैसे भी औरंगाबाद जिले की आबादी 25 लाख है और दवा 1 करोड़ 8 लाख खरीदी गई। अब सवाल उठता है कि 25 लाख की आबादी के लिए एक करोड़ से उपर दवा खरीदने की क्या दरकार थी। जरूरत की दवा अस्पताल में नहीं है और आयरन की 25 लाख से अधिक गोली एक्सपायर हो गई। आयरन की गोली इतनी संख्या में खरीदने के पीछे का तर्क है कि दवा कंपनी वाले इसमें अधिकारियों को अच्छा कमीशन देते हैं। सीएस व डीपीएम को मरीजों की चिंता की जगह अपनी जेब भरना था। सीएस डा. परशुराम भारती ने अपने पत्रांक 3298 दिनांक 8.12.11 के आदेश से भंडारपाल को सदर अस्पताल से अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र नवीनगर रोड तबादला किया है। भंडारपाल को 24 घंटे के अंदर प्रभार सौंपने का आदेश मिला है। योगदान नहीं देने पर सीएस ने अपने पत्र में स्वत: विरमित होने का आदेश निर्गत किया है। सीएस का यह आदेश मेडिकल विभाग में सुर्खियों में है। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, सहकारिता मंत्री, मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं डीएम को पत्र लिख दवा घोटाला के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कहा है कि मंत्री एवं डीडीसी के जांच के आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से जनता आक्रोशित है। उधर इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर युवा कांग्रेस नेता आंदोलन कर रहे हैं। अध्यक्ष आनंदशंकर, मीडिया प्रभारी मो. शहनवाज उर्फ सल्लू ने कहा कि राज्य की राजग सरकार घोटालों की सरकार है। जब तक दवा खरीद घोटाला में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती आंदोलन चलता रहेगा।
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