शहर में घटिया सड़क व नाला निर्माण पर सवाल उठ रहे है। शहर की सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल सकी। बारिश में सड़क टूटकर गढ्डों में तब्दील हो गई है। थोड़ी सी बारिश में सड़क पर झील सा नजारा दिखने लगता है। बाजार व सब्जी मंडी के पास पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। बनने के साथ ही सड़क की मरम्मत कार्य शुरू हो गई है। गड्ढों में बोल्डर भरा जा रहा है। नाला का निर्माण भी घटिया हो रहा है। बनने के साथ ही कई जगह नाला टूट गया है। नाला का निर्माण पानी निकासी के लिए की जा रही है या दिखावे के लिए समझ में नहीं आता। इस नाला से मोहल्ले का पानी निकल पाएगी कहना मुश्किल है। घटिया सड़क एवं नाला निर्माण पर कार्रवाई की मांग सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह उठाते रहे, मामले को ले चिल्लाते रहे परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीस सूत्री की बैठक में नाला कार्य बंद करने का निर्णय लिया गया परंतु कार्य चलता रहा। कार्रवाई न होने से ठेकेदारों का मनोबल बढ़ता रहा और सवाल उठाने वाले धराशायी होते रहे। शिकायत पर जिला के प्रभारी मंत्री पीके शाही ने विभागीय आयुक्त एवं सचिव से दूरभाष पर बात की। घटिया नाला व सड़क निर्माण की शिकायत की। जांच कराने की बात कही। चर्चा है कि प्रभारी मंत्री के शिकायत पर राज्य स्तरीय टीम शहर पहुंची और सड़क व नाला निर्माण की जांच कर चली गई। किसी को पता भी नहीं चला और जांच टीम शहर से फुर्र हो गई। आठ करोड़ की लागत से नाला निर्माण चल रहा है। पूछे जाने पर कार्यपालक अभियंता आरपी राजन ने बताया कि टूटे सड़क की मरम्मत कराई जा रही है। बताया कि राज्य स्तरीय टीम रिपोर्ट लिखकर ले गई है। अब तक जांच रिपोर्ट हमें प्राप्त नहीं हुआ है।
इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
Wednesday, 31 August 2011
पैसा है तो काम होगा, वरना कल आना
औरंगाबाद (नगर) : आम लोगों के हितों को ध्यान में रख कर एक तरफ जहां सेवा का अधिकार कानून लागू किया जाता है, वहीं जिले का निबंधन कार्यालय में बिना बिचौलिये के कोई कार्य नहीं हो पाता है.
हद तो यह है कि जिला निबंधन पदाधिकारी निगम प्रकाश ज्वाला जब से यहां आये हैं तब से इस कार्यालय का उनके निजी गाड़ी के चालक ही कर रहे हैं. जब कोई दस्तावेज नवीस रजिस्ट्री कराने के लिए निबंधन कार्यालय जाते हैं तो उनके चालक काम जल्दी करा देने के नाम पर पैसे मांगते हैं.
मंगलवार को कुछ दस्तावेज नवीसों ने इसकी जानकारी मीडिया को दी. सूचना मिलते ही प्रभात खबर की टीम कार्यालय पहुंची तो देखा कि चालक एक टेबुल लगा कर साहब के चेंबर के पास बैठा हुआ है व साहब चेंबर में आराम फरमा रहे हैं.
एक दस्तावेज नवीस हाथ में रजिस्ट्री कराने का कागजात लेकर लाया तो उसे चालक ने ले लिया व पैसे की मांग की. जब पैसा देने से इनकार कर दिया तो उसका कागजात काफी नीचे कर दिया गया. चालक ने कहा कि बगैर पैसे का कोई काम नहीं होता है.
पैसा है तो काम होगा वरना कल आना. जब चालक को मीडिया कर्मी के आने की जानकारी हुई तो वह कार्यालय से निकल गया. कुछ कर्मचारी ने इसकी सूचना साहब को दी तो वे आनन-फानन में कार्यालय में आकर बैठ गये. कुछ दस्तावेज नवीसों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अभी जो भी काम हो रहा है.
उसकी डिलिंग साहब के चालक ही करते हैं. इस संबंध में निबंधन पदाधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण चालक से काम लिया जा रहा था
हद तो यह है कि जिला निबंधन पदाधिकारी निगम प्रकाश ज्वाला जब से यहां आये हैं तब से इस कार्यालय का उनके निजी गाड़ी के चालक ही कर रहे हैं. जब कोई दस्तावेज नवीस रजिस्ट्री कराने के लिए निबंधन कार्यालय जाते हैं तो उनके चालक काम जल्दी करा देने के नाम पर पैसे मांगते हैं.
मंगलवार को कुछ दस्तावेज नवीसों ने इसकी जानकारी मीडिया को दी. सूचना मिलते ही प्रभात खबर की टीम कार्यालय पहुंची तो देखा कि चालक एक टेबुल लगा कर साहब के चेंबर के पास बैठा हुआ है व साहब चेंबर में आराम फरमा रहे हैं.
एक दस्तावेज नवीस हाथ में रजिस्ट्री कराने का कागजात लेकर लाया तो उसे चालक ने ले लिया व पैसे की मांग की. जब पैसा देने से इनकार कर दिया तो उसका कागजात काफी नीचे कर दिया गया. चालक ने कहा कि बगैर पैसे का कोई काम नहीं होता है.
पैसा है तो काम होगा वरना कल आना. जब चालक को मीडिया कर्मी के आने की जानकारी हुई तो वह कार्यालय से निकल गया. कुछ कर्मचारी ने इसकी सूचना साहब को दी तो वे आनन-फानन में कार्यालय में आकर बैठ गये. कुछ दस्तावेज नवीसों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अभी जो भी काम हो रहा है.
उसकी डिलिंग साहब के चालक ही करते हैं. इस संबंध में निबंधन पदाधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण चालक से काम लिया जा रहा था
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