औरंगाबाद, जागरण प्रतिनिधि :
खाद्य आपूर्ति मंत्री श्याम रजक द्वारा जब्त की गई 34 हजार बोरा धान को रिलीज करने की मांग को लेकर शनिवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। उनलोगों ने छापेमारी को साजिश बताते हुए जमकर नारेबाजी की। कहा कि धर्मकांटा पर किसान एवं पट्टेदारों से धान खरीदा गया था। मंत्री ने धान को जब्त कर लिया, जिससे किसानों को पैसा नहीं मिल रहा है।
प्रदर्शन के बाद सत्येन्द्र मेहता की अध्यक्षता में धरना पर बैठे किसान सोमारु पासवान, रघुनंदन साव, उपेन्द्र यादव, संजय कुमार गुप्ता, प्रकाश पासवान, युगेश्वर मेहता, सुनील कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में 77 लाख मिट्रिक टन धान की पैदावार हुई है। सरकारी खरीदगी का लक्ष्य 43 लाख मिट्रिक टन है। जाहिर है 43 लाख टन के अलावा धान बाजार में बिकेगा। मंत्री ने बगैर नियम कानून के छापेमारी की जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। धान की खरीद बिक्री का कोई कानून नहीं होता है। सेल टैक्स एवं लाइसेंसिंग प्रणाली समाप्त कर दी गई है। इसके बावजूद मंत्री ने छापेमारी की। खुले में धान रखा गया है। ऐसे में सूखने से धान वजन कमेगा। किसान सुधीर सिंह, हरि प्रसाद, जनेश्वर पासवान उपस्थित थे। किसानों ने कहा कि एसएफसी एवं पैक्स द्वारा जो धान की खरीदारी की जा रही है उसमें सात किलो प्रति क्विंटल की कटौती हो रही है। किसानों को समय से पैसे का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है जिस कारण कई किसान पैक्स एवं एसएफसी को धान देने को तैयार नहीं हैं।
इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
Saturday, 11 February 2012
नहीं थम रहा अवैध शराब का निर्माण
दाउदनगर (अनुमंडल) : तमाम प्रयासों के बावजूद अवैध शराब के कारोबारियों का धंधा बंद होने का नाम नहीं ले रहा है. इसके सेवन करने वाले लोगों को आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं.
सूत्रों का कहना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध देशी शराब निर्माण कुटीर व्यवसाय का रूप ले लिया है, जिसे अवैध शराब माफियाओं का संरक्षण प्राप्त रहता है. कई बार इस थाना क्षेत्र के गांवों से अवैध शराब, रेपर, मशीन सहित अन्य अन्य सामग्रियां पकड़ी जाती रही है. बावजूद इसके यह थम नहीं रहा है.
सूत्रों का कहना है कि शमशेर नगर, मेवा बिगहा, अकबरपुर, भगवान बिगहा, अरई, महेंद्रा चक, तरार, मनार व सिंदुआर के अलावा सोन तटीय क्षेत्र में अवैध शराब बनाने की शिकायतें प्राय प्राप्त होती रहती है. इनमें कई स्थानों पर महुआ शराब भी बनते हैं.
औचक छापामारी के दौरान ऐसे मामले पकड़े भी जाते रहे हैं, परंतु अवैध शराब माफियाओं के संरक्षण में फिर से ये धंधे शुरू हो जाता हैं. सूत्रों का कहना है कि औसतन दस से पंद्रह हजार अवैध देशी शराब का पाउच निर्माण कर समीप वर्ती प्रखंडों व जिलों में भेजा जाता है, जिससे कारोबारियों की तो चांदी रहती है.
इस शराब में न तो गुणवत्ता की गारंटी रहती है और न निर्धारित मापदंड का. हालांकि, थानाध्यक्ष ओम प्रकाश का कहना है कि अवैध शराब कारोबारियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस तत्पर है. सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है.
सूत्रों का कहना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध देशी शराब निर्माण कुटीर व्यवसाय का रूप ले लिया है, जिसे अवैध शराब माफियाओं का संरक्षण प्राप्त रहता है. कई बार इस थाना क्षेत्र के गांवों से अवैध शराब, रेपर, मशीन सहित अन्य अन्य सामग्रियां पकड़ी जाती रही है. बावजूद इसके यह थम नहीं रहा है.
सूत्रों का कहना है कि शमशेर नगर, मेवा बिगहा, अकबरपुर, भगवान बिगहा, अरई, महेंद्रा चक, तरार, मनार व सिंदुआर के अलावा सोन तटीय क्षेत्र में अवैध शराब बनाने की शिकायतें प्राय प्राप्त होती रहती है. इनमें कई स्थानों पर महुआ शराब भी बनते हैं.
औचक छापामारी के दौरान ऐसे मामले पकड़े भी जाते रहे हैं, परंतु अवैध शराब माफियाओं के संरक्षण में फिर से ये धंधे शुरू हो जाता हैं. सूत्रों का कहना है कि औसतन दस से पंद्रह हजार अवैध देशी शराब का पाउच निर्माण कर समीप वर्ती प्रखंडों व जिलों में भेजा जाता है, जिससे कारोबारियों की तो चांदी रहती है.
इस शराब में न तो गुणवत्ता की गारंटी रहती है और न निर्धारित मापदंड का. हालांकि, थानाध्यक्ष ओम प्रकाश का कहना है कि अवैध शराब कारोबारियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस तत्पर है. सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है.
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