Thursday, 19 September 2013

दाउदनगर प्रखंड के तरार पंचायत में पैरवी के बल पर दो बार इंदिरा आवास का लाभ

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : तरार पंचायत में इंदिरा आवास योजना का बुरा हाल है। अनियमितता कहें या घोटाले की धीरे-धीरे परत खुलने लगी है। इस काम में लगे दो युवा सर्वोदय प्रकाश शर्मा एवं पारसनाथ प्रसाद भी मानते हैं कि परत चाहे जितना उघाड़ दें, कई परतें खुलने से रह जाएगी। इंदिरा आवास योजना में बीडीओ और मुखिया पति रिश्वतखोरी से भले इंकार करते रहें, लेकिन लोगों का मानना है कि बिना पैसा और पैरवी के आखिर इस तरह की अनियमितता कैसे हो रही है। एक तरफ प्रतिक्षा सूची में नाम रहने के बावजूद पैसा नहीं देने वालों को आवास नहीं मिल रहा। उन्हें दर पर ठोकरें खानी पड़ रही है, वहीं बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें दुबारा आवास का लाभ मिल गया। ऐसे कम से कम 14 लाभुकों की दोनों ने पहचान की है। डीएम से शिकायत की है लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके अलावा और कई स्तर पर अनियमितता देखने में आयी है। डीएम को दिए आवेदन के अनुसार संतोष कुमार रेलवे में कार्यरत हैं। इनकी पत्नी ममता देवी को आवास मिला है। यह प्रावधान का खुला उल्लंघन है। सरोज देवी पति गौरी शंकर सिंह एवं सुगिया देवी राजेन्द्र राम का नाम प्रतिक्षा सूची में है ही नहीं, लेकिन तब भी दोनों को इंदिरा आवास योजना का लाभ दिया गया। चंदा देवी पति कुंजर राम अति पिछड़ वर्ग के चन्द्रवंशी जाति के हैं,लेकिन इन्हें अनुसूचित जाति का सदस्य बताकर आवास का लाभ दिया गया। युवाओं का सवाल है कि क्या ये तमाम गड़बड़ियां बिना किसी स्वार्थ में भूलवश हो गयी है? ग्रामीणों को मुखिया पति एवं इनके दलाल झूठ के सहारे समझाकर पैसों की उगाही करते हैं। जब विवाद बढ़ जाता है तो कुछ ऐसे पीड़ित भी हैं, जिनका लिया हुआ पैसा वापस किया गया है।

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