Saturday, 26 June 2010

मैं चोर हूं , लेकिन मनुष्य पहले

दाउदनगर (औरंगाबाद) बड़े अपराधियों, उग्रवादियों और सफेदपेशों के सामने सर झुकाकर चलने को अभ्यस्त पुलिस ने शनिवार को 'बहादुर अंदाज' में दिखा। उसने राजू कुमार नामक युवक को शुक्रवार की शाम टेम्पो चालक से लड़ते वक्त पकड़ा। तब उसे पता चला कि यह 'कुख्यात चोर राजू' है। थानाध्यक्ष एसए अहमद के अनुसार राजू के खिलाफ चोरी के आधा दर्जन मामले दर्ज है। जानकारी होते ही पुलिस ने राजू के गले में तख्ती लटकाया जिस पर लिखा था 'मैं चोर हूं, नाम राजू कुमार, पिता .. और दाउदनगर लिखा हुआ था।' कमर में रस्सी, डंडा लिए पुलिस के दो जवान उसे नगर भ्रमण कराकर थाना से अदालत ले गए। उसके फटे कपड़े यह बात रहे थे कि उसे पीटा गया है। पुलिस का यह कारनामा पूरी तरह मानवाधिकार आयोग के आदेशों और निर्देशों का खुल्लमखुला उल्लंघन है। वह युवक निहायत गरीब परिवार से आता है। जिस रास्ते पुलिस उसे ले गई उसी रास्ते पर उसके पिता और भाई जूता चप्पल की दुकान चलाते है। राजू की हरकत से उसका परिवार परेशान रहा है। यह मान्य तथ्य है कि कभी कोई घर का लड़का इतना बदमाश निकल जाता है कि उस पर मां पिता का कोई नियंत्रण नहीं रह जाता, लेकिन जब युवक के गले में उसके बाप और घर का पता टंगा हो तो एक कथित चोर बदनाम नहीं होता बल्कि उसका पूरा परिवार अपमानित महसूस करता है। उसके पिता और भाई को यह दृश्य देखकर कैसा लगा होगा उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

3 comments:

  1. पुलिस की यह गैरजिम्मेदार हरकत है

    ReplyDelete
  2. ठिक है कि वह चोर है पर पुलिस वालो का यह मिजाज ठीक नही
    भारत प्रश्न मंच आपका स्वागत करता है. http://mishrasarovar.blogspot.com/

    ReplyDelete