इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
Tuesday, 17 May 2011
कमाल की अभियंत्रिकी, हवा में टंगी सड़क
दाउदनगर के वार्ड नंबर 2 स्थित बालूगंज मुहल्ला में इन्द्रदेव चौधरी के घर से रामभजन चौधरी के घर तक बनी सड़क में कमाल की इंजीनियरिंग की गई है। यह सड़क हवा में टंगी हुई है। सड़क का निर्माण अभी अधूरा है। करीब 50 फीट नाली का निर्माण होना शेष है। बीआरजीएफ योजना के तहत 1 लाख 80 हजार रुपए की लागत से यह सड़क बननी है। ठेकेदार और संबंधित अभियंता के अनुसार डेढ़ लाख रुपए का बिल बनाया गया है जिसमें से 1 लाख का भुगतान किया गया है। सड़क निर्माण में इंजीनियरिंग की विफलता साफ दिखती है। सड़क निर्माण शुरू होने के वक्त ही जब नाली की ऊंचाई अधिक देखी गई तो स्थानीय जनों द्वारा इसका विरोध किया गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वार्ड पार्षद रामऔतार चौधरी के अनुसार नाली ऊंचा होने के कारण सड़क ऊंची बना दी गई है। नीचे बालू भरा गया है जो भरक गया है नतीजा सड़क हवा में टंग गई है। सड़क के नीचे कई फीट तक जमीन और सड़क के बीच खालीपन है। नतीजा बीच में ही सड़क दरक गई है। सड़क जहां से शुरू होती है वहां किनारे में टूट गया है। इस समस्या के लिए निर्मात्री एजेंसी से ज्यादा ले आउट करने वाले कनीय अभियंता को दोषी माना जा रहा है। निर्मात्री एजेंसी के कमलेश सिंह चन्द्रवंशी ने बताया कि मौके पर ले आउट करने वाले जेई प्रमोद कुमार ने बालू भर कर सड़क बनाने के लिए कहा था इसलिए उन्होंने ऐसी सड़क बनाई। सड़क की दाईं ओर नाली है और बाईं तरफ खेत जहां सुरक्षा दीवार बनाकर बालू की भराई कर सड़क निर्माण किया जाना चाहिए था लेकिन कनीय अभियंता ने ऐसा नहीं किया। जेई ने बताया कि उनके पूर्ववर्ती जेई द्वारा इस सड़क का प्राक्कलन बनाया गया था जिसमें सुरक्षा दीवार बनाने का प्रावधान नहीं है। कहा कि सुरक्षा दीवार बनाने की बात हुई है। प्रावधान किया जा रहा है। बता दें कि अगर जल्दी ही सुरक्षा दीवार नहीं बनाई जाती तो इस सड़क का जीवन कभी भी खत्म हो सकता है। अभियंत्रिकी विफलता की वजह से हजारों रुपए की क्षति हो चुकी है और पूरी सड़क बर्बाद होने की स्थिति में है।
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