Nov 15,
औरंगाबाद, जागरण संवाददाता :
इंदिरा आवास मामले में लाभुकों के पैसे बैंक से फर्जी हस्ताक्षर कर निकाल लेने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को ओबरा प्रखंड के डिहरा पंचायत मुख्यालय निवासी चंदा खातून ने डीडीसी रामनिवास पाण्डेय को आवेदन देकर इंदिरा आवास के प्रथम किस्त 24 हजार रुपए सचिव सूर्यदयाल राम द्वारा निकाल कर गबन कर लिए जाने की शिकायत की है। महिला लाभुक ने बताया कि वर्ष 2008 में मेरे नाम से इंदिरा आवास स्वीकृत हुआ था। सचिव ने गांव में ग्रामीण बैंक रहते 10 किलोमीटर दूर गैनी ग्रामीण बैंक में खाता खुलवाया। खाते में प्रथम किस्त 24 हजार रुपया भेजा गया। द्वितीय किस्त 11 हजार रूपये डाला गया था। राशि निकालने बैंक पहुंचे तो खाते में 11 हजार रुपए शेष जमा की जानकारी मिली। प्रथम किस्त की राशि की जानकारी मांगी तो नहीं दी गई। आरटीआई का सहारा लिया तो पंचायत सचिव ने दलाल के माध्यम से प्रथम किस्त की राशि निकाल लेने की जानकारी प्राप्त हुई। मूल पासबुक भी सचिव ने अपने पास रखे हैं। डीडीसी ने कहा कि स्टोनो ललन कुमार ने सचिव से जब पूछा तो वे 24 हजार रूपये निकाले जाने की बात स्वीकार की है। जांच के बाद सचिव पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बैंक प्रबंधक की भूमिका की जांच होगी। मामले में जो भी दोषी पाये जाएंगे उन्हें जेल भेजा जाएगा।
इस ब्लॉग में औरंगाबाद(बिहार) से संबंधित वैसे खबरों को पोस्ट किया जाता है, जिसपर वरीय पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना अत्यावश्यक लगे । इसके सेटिंग में मुख्य सचिव (बिहार), पुलिस महानिदेशक (बिहार), जिला पदाधिकारी (औरंगाबाद), पुलिस अधीक्षक (औरंगाबाद) तथा माननीय मुख्यमंत्री (बिहार) का इमेल आईडी फीड किया हुआ है, जिससे ब्लॉग पोस्ट की एक प्रति स्वतः उनके पास पहुँच जाती है । यह बिल्कुल से अखबारों में छपे मूल समाचार होते हैं और मेरा उद्देश्य इन खबरों को वरीय पदाधिकारियों तक पहुँचाना मात्र है ।
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Tuesday, 15 November 2011
Tuesday, 27 September 2011
न्याय दीजिए नहीं तो करेंगे आत्महत्या
रफीगंज (औरंगाबाद), निज प्रतिनिधि : हसपुरा के भतन बिगहा की पुनरावृति प्रखंड के दुगुल पंचायत के शाहगंज गांव में हो सकती है। इंदिरा आवास पीड़ित परिवार रफीक अहमद ने डीएम के जनता दरबार में आवेदन देते हुए न्याय की गुहार लगाई है। न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने की धमकी दी है। रफीक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2010-11 में हमें इंदिरा आवास मिला। रफीगंज कोआपरेटिव बैंक में खाता खोला गया और पैसे की निकासी कर ली गई। 7 सितम्बर को इंदिरा आवास जांच के क्रम में अधिकारी शाहगंज गांव पहुंचे। रफीक ने इंदिरा आवास के लिए गुहार लगाई तो अधिकारियों ने बताया कि उसे इंदिरा आवास आवंटित हो चुका है। अधिकारियों ने इंदिरा आवास के पैसे से आवास बनाने का आदेश दिया। कहा कि अगर ऐसा नहीं करेंगे तो प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। रफीक ने डीएम ने जनता दरबार में आवेदन दिया है जिसमें पूर्व उपमुखिया शमीम आलम एवं बैंक के अधिकारियों पर पैसा हड़पने का आरोप लगाया है। डीएम ने मामले में बीडीओ को जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
Friday, 19 August 2011
मामला सत्य पाया गया तो थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई होगी।
औरंगाबाद, कार्यालय संवाददाता :
धनवानों की लड़ाई में गुरुवार को नगर थानाध्यक्ष की चांदी कटी। हुआ यह कि प्रेम दारुका एवं दिवंगत हुए डा. बीएल दारुका की पत्नी अरुणा दारुका के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हुआ। दोनों के बीच तनातनी हुई तो सूचना थाने में पहुंची। पहले पीएसआई शकुंतला, फिर अविनाश और बाद में थानाध्यक्ष वृजनंदन महतो पहुंचे। अरुणा ने पुलिस को लिखित बयान दिया कि प्रेम दारुका एवं उसके परिजन मेरे घर को जबरदस्ती कब्जा करना चाहते हैं। मेरे घर में दीवार तोड़कर सामान भी चुराए हैं। पुलिस ने प्रेम दारुका के परिजनों को थाने पर बुलाया। प्रेम का पुत्र मनीष दारुका एवं राकेश सिंह थाना पहुंचे तो थानाध्यक्ष ने दोनों को हाजत में बंद कर दिया। पैसे के लिए दबाव बनाया और रात्रि 12 बजे प्रेम के घर पहुंचे। प्रेम के पुत्र मनीष दारुका की पत्नी विभा दारुका को थानाध्यक्ष रात्रि में गिरफ्तार कर थाने ले जाने की धमकी देने लगे। विभा को बुधवार शाम को पुत्री हुई थी जिस कारण वह घर में सोई हुई थी। विभा की गिरफ्तारी की बात सुन प्रेम के परिजन भावुक हो गए और थानाध्यक्ष से छोड़ने की गुहार लगाने लगे। थानाध्यक्ष ने विभा को छोड़ने के लिए पांच लाख रुपए की मांग की। नहीं देने पर थाना ले जाने की धमकी दी। थानाध्यक्ष की धमकी से डरे प्रेम के परिजनों ने पहले पचास हजार देने को तैयार हुए परंतु थानाध्यक्ष नहीं माने। प्रेम के परिजनों एवं संजू अग्रवाल की माने तो थानाध्यक्ष तीन लाख रुपए पर अड़ गए। रात्रि में ही थानाध्यक्ष को पैसा दिया गया। न्याय की गुहार लेकर प्रेम के परिजन शुक्रवार सुबह एसपी आवास पहुंचे परंतु उनकी मुलाकात एसपी से नहीं हो सकी। मनीष दारुका ने बताया कि मुझे थाने से छोड़ते वक्त थानाध्यक्ष ने पैसे की बात कहीं न कहने की धमकी दी। मनीष के परिजन न्याय के लिए एसपी से मिलना चाहते हैं परंतु उनकी मुलाकात संवाद प्रेषण तक नहीं हो सकी है। मामले में पूछे जाने पर एसपी डा. सिद्धार्थ ने बताया कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। मामला सत्य पाया गया तो थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई होगी। उधर इस पूरे मामले में पूछे जाने पर थानाध्यक्ष ने बताया कि मैंने प्रेम के परिजनों के खिलाफ कानून संगत कार्रवाई की है। उनसे न तो मैंने पैसा मांगा है और न ही लिया है। प्रेम के परिजनों का आरोप गलत है। बहरहाल, इस पूरे मामले की चर्चा शहर में जोरों पर है।
धनवानों की लड़ाई में गुरुवार को नगर थानाध्यक्ष की चांदी कटी। हुआ यह कि प्रेम दारुका एवं दिवंगत हुए डा. बीएल दारुका की पत्नी अरुणा दारुका के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हुआ। दोनों के बीच तनातनी हुई तो सूचना थाने में पहुंची। पहले पीएसआई शकुंतला, फिर अविनाश और बाद में थानाध्यक्ष वृजनंदन महतो पहुंचे। अरुणा ने पुलिस को लिखित बयान दिया कि प्रेम दारुका एवं उसके परिजन मेरे घर को जबरदस्ती कब्जा करना चाहते हैं। मेरे घर में दीवार तोड़कर सामान भी चुराए हैं। पुलिस ने प्रेम दारुका के परिजनों को थाने पर बुलाया। प्रेम का पुत्र मनीष दारुका एवं राकेश सिंह थाना पहुंचे तो थानाध्यक्ष ने दोनों को हाजत में बंद कर दिया। पैसे के लिए दबाव बनाया और रात्रि 12 बजे प्रेम के घर पहुंचे। प्रेम के पुत्र मनीष दारुका की पत्नी विभा दारुका को थानाध्यक्ष रात्रि में गिरफ्तार कर थाने ले जाने की धमकी देने लगे। विभा को बुधवार शाम को पुत्री हुई थी जिस कारण वह घर में सोई हुई थी। विभा की गिरफ्तारी की बात सुन प्रेम के परिजन भावुक हो गए और थानाध्यक्ष से छोड़ने की गुहार लगाने लगे। थानाध्यक्ष ने विभा को छोड़ने के लिए पांच लाख रुपए की मांग की। नहीं देने पर थाना ले जाने की धमकी दी। थानाध्यक्ष की धमकी से डरे प्रेम के परिजनों ने पहले पचास हजार देने को तैयार हुए परंतु थानाध्यक्ष नहीं माने। प्रेम के परिजनों एवं संजू अग्रवाल की माने तो थानाध्यक्ष तीन लाख रुपए पर अड़ गए। रात्रि में ही थानाध्यक्ष को पैसा दिया गया। न्याय की गुहार लेकर प्रेम के परिजन शुक्रवार सुबह एसपी आवास पहुंचे परंतु उनकी मुलाकात एसपी से नहीं हो सकी। मनीष दारुका ने बताया कि मुझे थाने से छोड़ते वक्त थानाध्यक्ष ने पैसे की बात कहीं न कहने की धमकी दी। मनीष के परिजन न्याय के लिए एसपी से मिलना चाहते हैं परंतु उनकी मुलाकात संवाद प्रेषण तक नहीं हो सकी है। मामले में पूछे जाने पर एसपी डा. सिद्धार्थ ने बताया कि शिकायत की जांच कराई जाएगी। मामला सत्य पाया गया तो थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई होगी। उधर इस पूरे मामले में पूछे जाने पर थानाध्यक्ष ने बताया कि मैंने प्रेम के परिजनों के खिलाफ कानून संगत कार्रवाई की है। उनसे न तो मैंने पैसा मांगा है और न ही लिया है। प्रेम के परिजनों का आरोप गलत है। बहरहाल, इस पूरे मामले की चर्चा शहर में जोरों पर है।
Wednesday, 3 August 2011
औरंगाबाद में मुखिया व सरपंच को दरोगा ने पीटा
मुफ्फसिल थाना परिसर में बुधवार की शाम ओरा पंचायत मुखिया अनिल कुमार एवं सरपंच शिवकुमार राम की दारोगा ने पिटाई कर दी। मुखिया एवं सरपंच की पिटाई के बाद उग्र ग्रामीणों ने जीटी रोड जाम कर थाने का घेराव किया। ग्रामीण दरोगा पर प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे। नगर पार्षद रमेश यादव, मुखिया एवं सरपंच के नेतृत्व में घेराव कर रहे ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस प्रशासन हाय-हाय, चोर दारोगा को गिरफ्तार करो के नारे लगा रहे थे। मुखिया एवं सरपंच ने बताया कि मारपीट के पुराने मामले में गिरफ्तार ओरा गांव निवासी भोला यादव का न्यायालय से जमानत का रिकाल लेकर थाना आया था। रिकाल दिखाया तो छोड़ने के लिए दोनों प्रशिक्षु दारोगा ने दस हजार रुपए की मांग की। पैसा नहीं देने पर पीटा। दारोगा ने मुखिया एवं सरपंच को भद्दी गालियां दी। थाना का घेराव एवं जीटी रोड जाम कर रहे ग्रामीणों को एसडीपीओ संजय कुमार ने समझाया। उन्होंने कहा कि दोषी दारोगा के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एसडीपीओ ने कहा कि दारोगा ने मुखिया को नहीं हमें पीटा है। मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को मुखिया एवं सरपंच को एडीजी के बैठक में गया भाग लेने भेजा था। दोनों जनता के बीच लोकप्रिय हैं। एसडीपीओ के आश्वासन के बाद थाना का घेराव कर रहे ग्रामीण शांत हुए और जीटी रोड से जाम हटाया।
Sunday, 10 July 2011
डीजल अनुदान राशि खा गए साहब
समाहरणालय में गुरुवार को डीएम अभय कुमार सिंह ने जनता दरबार में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। ओबरा प्रखंड के चंदा पंचायत के पिसाय गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने डीजल अनुदान राशि में घोटाले की शिकायत की। कहा कि पंचायत सेवक मनोज सिंह अनुदान राशि को खा गए। मन में आया तो कुछ किसानों को दिया अन्यथा सभी पैसे लूट ले गए। ग्रामीण टुनटुन पाण्डेय, अरविंद पाण्डेय, विश्वनाथ पाण्डेय, सुधीर पाण्डेय, बैकुंठ पाण्डेय, मुकेश पाण्डेय ने कहा कि जिन ग्रामीणों को पैसे मिले हैं उन्हें भी राशि कम मिली है। डीएम ने मामले में बीडीओ को जांच करने के आदेश दिए हैं। देव प्रखंड के बरंडा रामपुर पंचायत से पहुंचे ग्रामीणों ने इंदिरा आवास में गड़बड़ी की शिकायत की। कहा कि छह माह पहले खाता खोलवाने के लिए कहा गया परंतु आज तक पैसा नहीं मिला। मुखिया दिनेश सिंह एवं सचिव उपेन्द्र सिंह की मिलीभगत से आवास में घोटाला किया जा रहा है। गनौरी भुईयां, नागेश्वर भुईयां, रामप्रवेश भुईयां, संतोष ठाकुर, अखिलेश राम ने आवास राशि दिलाने की गुहार लगाई। डीएम ने जनता दरबार में 104 मामलों की सुनवाई की। शहर के रामराज्य नगर से पहुंची बिंदू देवी एवं रवि कुमार के आवेदन पर डीएम ने विकलांगता पेंशन 22 जुलाई तक देने का आदेश दिया। दाउदनगर से पहुंची टोला सेवक सुनिता कुमारी ने मानदेय भुगतान की गुहार लगाई। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी को मानदेय भुगतान करने का आदेश दिया गया। गोह से पहुंचे करमदेव सिंह ने जेपी स्वतंत्रता सेनानी पेंशन राशि के भुगतान के संबंध में शिकायत की। छात्रवृत्ति नहीं मिलने की शिकायत पूजा कुमारी ने की जिस पर डीएम ने कल्याण पदाधिकारी को अविलंब कार्रवाई का आदेश दिया। जनता दरबार में सभी अधिकारी उपस्थित थे।
मध्य विद्यालय का नवनिर्मित भवन गिरा
प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बहुआरा का नवनिर्मित भवन गुरुवार को गिर गया। बताया जाता है कि बुधवार रात्रि विद्यालय भवन के छत की ढलाई की गई थी। ग्रामीण कामदेव सिंह, संतोष सिंह, सुनील सिंह, अखिलेश सिंह ने बताया कि ढलाई के समय ही घटिया सामग्री देख ग्रामीणों ने विरोध किया था। विरोध के बावजूद जेई अभिमन्यु सिंह ने छत ढलाई कराया। ढलाई करते समय कई बार सेट्रिंग गिरा इसके बावजूद ढलाई होता रहा। ग्रामीणों की भीड़ देख जेई भाग खड़े हुए। जेई ने बताया कि प्राक्कलन के अनुसार कार्य हो रहा था। अब सवाल उठता है कि 8 लाख 56 हजार 100 रुपए की लागत से दो कमरे का निर्माण होना था। 8 लाख में दो कमरा का सही ढलाई भी न हो यह अपने आप में सवाल है। प्रधानाध्यापक ब्रज मोहन मिश्रा ने बताया कि विद्यालय का निर्माण कार्य जेई की देखरेख में हो रहा था। पूरा छत गिरकर ध्वस्त हो गया है।
बीईओ के पत्र से शिक्षा विभाग में कोहराम
रफीगंज (औरंगाबाद), निज प्रतिनिधि : शिक्षा विभाग में सबकुछ जायज है। कभी कोई कर्मी डीएम के हस्ताक्षर से पत्र निकालता है तो कभी बीईओ शिक्षक नियोजन में गड़बड़ी की जांच में दो पत्र निकालते हैं। रफीगंज बीईओ मोजीब अंसारी ने तो हद कर दी। एक ही पत्रांक व दिनांक से उन्होंने दो पत्र निकाले। मामला भेटनिया पंचायत में शिक्षक नियोजन से संबंधित है। पत्र की चर्चा शिक्षा विभाग में खूब हो रही है। शिक्षक अभ्यर्थी में बवाल मचा है। बताया जाता है कि भेटनिया पंचायत के शिक्षक बहाली में धांधली की गई थी। इसकी शिकायत अधिक अंक वाली अभ्यर्थी मिंटू सिन्हा ने डीएम के जनता दरबार में की। बताया कि हमसे कम अंक के अभ्यर्थी मंजु कुमारी का चयन मुखिया एवं पंचायत सचिव ने पैसा लेकर कर दिया है। डीएम ने मामले की जांच डीएसई को दिया। डीएसई ने बीईओ को जांच कर रिपोर्ट देने का कहा। बीईओ ने डीएम कार्यालय में जो जांच रिपोर्ट भेजा उसमें मंजू की बहाली को गलत बताया गया। मिंटू सिन्हा को अधिक अंक होने के बावजूद बहाली न करने की बात कही। बीईओ के पत्रांक 139 दिनांक 30 जनवरी 2011 से यह पत्र निर्गत हुआ। इसी पत्रांक से बीईओ ने दूसरा पत्र निर्गत किया जिसमें मिंटू सिन्हा के काउंसलिंग में शामिल नहीं होने की बात कही। दूसरे पत्र में ज्यादा अंक होने के बावजूद मिंटू सिन्हा की बहाली मुखिया एवं सचिव द्वारा नहीं करने की बात कही। मामला अपीलीय प्राधिकार के यहां चल रहा है। यहां दोनों पत्र संलग्न है। पूछे जाने पर बीईओ ने बताया गलती से इस प्रकार का जांच प्रतिवेदन लिखा गया है। पहले जांच प्रतिवेदन को नियोजन इकाई को फाड़ने का निर्देश दिया गया था परंतु उसने ऐसा नहीं किया। बीईओ की गलती से उच्च अंक वाली अभ्यर्थी मिंटू कार्यालयों का चक्कर लगाते थक चुकी है। दर्जनों बार डीएम के जनता दरबार एवं अपीलीय प्राधिकार के यहां गई परंतु उसे अब तक न्याय नहीं मिला। मामले में बीईओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है। बताया जाता है कि बीईओ के कार्यालय में दलाल सक्रिय हैं। पैसे के फेरा में कार्यालय से ऐसे कई पत्र निर्गत हुए हैं।
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